5 Major Types of Contract in Business Law: अनुबंधों के प्रकार

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Types of Contract व्यवसाय (Business) की दुनिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब भी दो या दो से अधिक पक्ष (Parties) किसी कार्य, सेवा या वस्तु के आदान-प्रदान के लिए सहमत होते हैं, तो यह समझौता एक अनुबंध का रूप ले सकता है। व्यवसायिक कानून (Business Law) में अनुबंध न केवल कानूनी ढांचे (Legal Framework) को सुनिश्चित करता है बल्कि पक्षों के अधिकारों और दायित्वों (Rights & Duties) को भी स्पष्ट करता है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि अनुबंध क्या है और इसके प्रमुख प्रकार (Types of Contract) कौन-कौन से होते हैं।

भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 (Indian Contract Act, 1872) के अनुसार:
“जब कोई समझौता कानून द्वारा प्रवर्तनीय (Enforceable by Law) होता है, तो उसे अनुबंध कहा जाता है।”

अर्थात, हर वह समझौता जो कानूनी रूप से मान्य है और जिसे अदालत में लागू कराया जा सकता है, एक अनुबंध कहलाता है।

5 Main Types of Contract in Business Law: अनुबंधों के प्रकार

व्यवसायिक कानून में अनुबंधों को कई आधारों पर विभाजित किया गया है। आइए इन्हें अलग-अलग श्रेणियों में समझते हैं।

1. अनुबंध की वैधता (Validity) के आधार पर

  1. वैध अनुबंध (Valid Contract)

    • ऐसा अनुबंध जो सभी कानूनी शर्तों को पूरा करता हो।

    • उदाहरण: किसी दुकान से प्रॉडक्ट खरीदने का लिखित समझौता।

  2. अमान्य अनुबंध (Void Contract)

    • ऐसा अनुबंध जो प्रारंभ में वैध था लेकिन बाद में अमान्य हो गया।

    • उदाहरण: प्राकृतिक आपदा के कारण माल सप्लाई न कर पाने की स्थिति।

  3. अमान्य समझौता (Void Agreement)

    • ऐसा समझौता जो शुरू से ही अमान्य हो।

    • उदाहरण: अवैध गतिविधि के लिए किया गया अनुबंध।

  4. विधिक रूप से अपूर्ण अनुबंध (Voidable Contract)

    • ऐसा अनुबंध जिसमें किसी एक पक्ष के पास इसे स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार हो।

    • उदाहरण: दबाव में हस्ताक्षर किया गया अनुबंध।

  5. अवैध अनुबंध (Illegal Contract)

    • ऐसा अनुबंध जो कानून द्वारा निषिद्ध हो।

    • उदाहरण: मादक पदार्थों (Drugs) की बिक्री का अनुबंध।

2. गठन (Formation) के आधार पर

  1. स्पष्ट अनुबंध (Express Contract)

    • मौखिक या लिखित रूप में स्पष्ट रूप से बनाया गया अनुबंध।

    • उदाहरण: कंपनी और कर्मचारी के बीच लिखित जॉब एग्रीमेंट।

  2. निहित अनुबंध (Implied Contract)

    • ऐसा अनुबंध जो पक्षों के आचरण या परिस्थितियों से स्वतः बनता है।

    • उदाहरण: टैक्सी में बैठने पर किराया देना।

  3. क्वासी अनुबंध (Quasi Contract)

    • यह वास्तविक अनुबंध नहीं होता, लेकिन न्यायालय इसे लागू कर सकता है ताकि किसी पक्ष को अनुचित लाभ न मिले।

    • उदाहरण: यदि कोई व्यक्ति गलती से दूसरे को पैसा दे देता है, तो वापसी का अधिकार होता है।

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3. निष्पादन (Performance) के आधार पर

  1. निष्पादित अनुबंध (Executed Contract)

    • जब दोनों पक्ष अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी कर चुके हों।

    • उदाहरण: प्रॉडक्ट का भुगतान और डिलीवरी दोनों पूरी हो चुकी हों।

  2. निष्पादन हेतु अनुबंध (Executory Contract)

    • जब किसी एक या दोनों पक्षों की जिम्मेदारियाँ अभी बाकी हों।

    • उदाहरण: किसी सप्लायर से भविष्य की तारीख पर माल सप्लाई करने का अनुबंध।

4. प्रतिफल (Consideration) के आधार पर

  1. द्विपक्षीय अनुबंध (Bilateral Contract)

    • जब दोनों पक्ष एक-दूसरे को वचन देते हैं।

    • उदाहरण: एक पक्ष माल देगा और दूसरा भुगतान करेगा।

  2. एकपक्षीय अनुबंध (Unilateral Contract)

    • जब केवल एक पक्ष वचन देता है और दूसरा पक्ष केवल कार्य करता है।

    • उदाहरण: इनाम की घोषणा (Reward Contract)।

5. विशेष अनुबंध (Special Contracts)

भारतीय अनुबंध अधिनियम में कुछ विशेष अनुबंधों का भी उल्लेख है:

  1. प्रतिभूति अनुबंध (Contract of Indemnity) – किसी हानि की भरपाई करने का अनुबंध।

  2. गारंटी अनुबंध (Contract of Guarantee) – किसी ऋण या दायित्व की गारंटी देना।

  3. बेलमेंट अनुबंध (Contract of Bailment) – किसी वस्तु को एक निश्चित उद्देश्य से दूसरे को देना।

  4. प्रतिज्ञप्ति अनुबंध (Contract of Pledge) – किसी ऋण के बदले वस्तु गिरवी रखना।

  5. एजेंसी अनुबंध (Contract of Agency) – जब एक व्यक्ति दूसरे की ओर से कार्य करने को सहमत होता है।

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व्यवसायिक कानून में अनुबंधों की तुलनात्मक तालिका

आधार (Basis)प्रकार (Types)विवरण (Description)उदाहरण (Example)
Validity (वैधता)Valid Contract (वैध अनुबंध)जो सभी कानूनी शर्तें पूरी करता हैदुकान से सामान खरीदने का समझौता
 Void Contract (अमान्य अनुबंध)प्रारंभ में वैध लेकिन बाद में अमान्यबाढ़ के कारण सप्लाई न कर पाना
 Void Agreement (अमान्य समझौता)शुरू से ही अवैध समझौताअवैध काम का अनुबंध
 Voidable Contract (विधिक रूप से अपूर्ण अनुबंध)किसी एक पक्ष की सहमति पर निर्भरदबाव में हस्ताक्षर किया गया अनुबंध
 Illegal Contract (अवैध अनुबंध)कानून द्वारा निषिद्ध अनुबंधड्रग्स बेचने का अनुबंध
Formation (गठन)Express Contract (स्पष्ट अनुबंध)मौखिक/लिखित अनुबंधजॉब एग्रीमेंट
 Implied Contract (निहित अनुबंध)आचरण से बना अनुबंधटैक्सी में बैठकर किराया देना
 Quasi Contract (क्वासी अनुबंध)वास्तविक नहीं, पर न्यायालय लागू करता हैगलती से भुगतान वापस लेना
Performance (निष्पादन)Executed Contract (निष्पादित अनुबंध)दोनों पक्ष दायित्व पूरे कर चुकेभुगतान और सामान डिलीवरी पूरी
 Executory Contract (निष्पादन हेतु अनुबंध)दायित्व अभी बाकीभविष्य की तारीख पर सप्लाई का अनुबंध
Consideration (प्रतिफल)Bilateral Contract (द्विपक्षीय अनुबंध)दोनों पक्ष वचन देते हैंसामान देना और भुगतान करना
 Unilateral Contract (एकपक्षीय अनुबंध)केवल एक पक्ष वचन देता हैइनाम की घोषणा

निष्कर्ष

व्यवसायिक कानून में अनुबंध (Contract) केवल कानूनी दस्तावेज़ ही नहीं बल्कि व्यवसायिक लेन-देन की नींव होते हैं। सही प्रकार के अनुबंधों (Types of Contract) की समझ होने से न केवल व्यापार सुरक्षित रहता है, बल्कि विवादों की संभावना भी कम हो जाती है।

इसलिए, हर उद्यमी, व्यवसायी और पेशेवर को अनुबंधों के प्रकार और उनके महत्व की गहरी जानकारी होनी चाहिए।

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अनुबंध (Contract) क्या होता है?

अनुबंध दो या अधिक पक्षों के बीच किया गया एक कानूनी समझौता होता है, जिसे कानून द्वारा लागू किया जा सकता है।

अनुबंध अधिकारों, कर्तव्यों और दायित्वों को स्पष्ट करता है तथा विवादों से बचाव करता है।

वैध अनुबंध वह होता है जो भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की सभी शर्तों को पूरा करता है।

अवैध अनुबंध वह होता है जिसका उद्देश्य कानून के विरुद्ध होता है और जो न्यायालय द्वारा मान्य नहीं होता।

शून्य अनुबंध वह होता है जो कानून की दृष्टि में कभी भी वैध नहीं होता या बाद में अमान्य हो जाता है।

यह वह अनुबंध होता है जो एक पक्ष की इच्छा पर वैध या अवैध किया जा सकता है।

जिस अनुबंध में दोनों पक्षों ने अपने-अपने दायित्व पूरे कर दिए हों, उसे निष्पादित अनुबंध कहते हैं।

जिस अनुबंध में दोनों या किसी एक पक्ष का दायित्व पूरा होना बाकी हो, वह निष्पादनाधीन अनुबंध कहलाता है।

जिस अनुबंध की शर्तें स्पष्ट रूप से लिखित या मौखिक रूप में बताई गई हों, उसे व्यक्त अनुबंध कहते हैं।

जो अनुबंध पक्षों के व्यवहार या परिस्थितियों से स्वतः बन जाता है, उसे निहित अनुबंध कहते हैं।

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