अनौपचारिक संचार (Informal Communication): सम्‍पूर्ण जानकारी

अनौपचारिक संचार

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संचार किसी भी संगठन या समाज की नींव होता है। यह केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के बीच विचारों, भावनाओं, सुझावों और अनुभवों को साझा करने का माध्यम भी है। संगठन में संचार के दो मुख्य रूप होते हैं — औपचारिक संचार और अनौपचारिक संचार (Informal Communication)। जहां औपचारिक संचार एक निर्धारित ढांचे और नियमों का पालन करता है, वहीं अनौपचारिक संचार अधिक सहज, स्वतंत्र और भावनात्मक होता है।

अनौपचारिक संचार वह संचार है जो संगठन की आधिकारिक संरचना से परे होता है। यह कर्मचारियों या व्यक्तियों के बीच व्यक्तिगत संबंधों, मित्रता, विश्वास और सामाजिक संपर्कों पर आधारित होता है। इसे सामान्य भाषा में “ग्रेपवाइन (Grapevine)” भी कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी निर्धारित दिशा या प्रक्रिया के फैलता है।

अनौपचारिक संचार की विशेषताएँ (Characteristics of Informal Communication)

  1. स्वतंत्र और सहज (Spontaneous):
    यह बिना किसी योजना या नियम के स्वतः होता है।

  2. व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित:
    इसमें मित्रता, आपसी समझ और विश्वास का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

  3. अनौपचारिक भाषा का प्रयोग:
    इसमें आम बोलचाल की भाषा, हाव-भाव और इशारों का प्रयोग होता है।

  4. गोपनीयता की कमी:
    इसमें सूचना तेज़ी से फैलती है और कभी-कभी अफवाह का रूप भी ले लेती है।

  5. भावनात्मक तत्वों से भरपूर:
    यह केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भावनाओं, विचारों और अनुभवों का भी होता है।

 

अनौपचारिक संचार के प्रकार (Types of Informal Communication)

Types of Informal Communication

अनौपचारिक संचार कई रूपों में हो सकता है:

  1. एक से एक (Single Strand):

इसमें एक व्यक्ति दूसरे को जानकारी देता है, फिर वह किसी और को देता है, और इसी तरह यह आगे बढ़ती है।

  1. गॉसिप चेन (Gossip Chain):

इसमें एक व्यक्ति सभी को जानकारी देता है, चाहे वह उनसे संबंधित हो या नहीं।

  1. प्रॉबेबिलिटी चेन (Probability Chain):

इसमें कोई भी व्यक्ति किसी भी अन्य व्यक्ति को जानकारी दे सकता है, और यह अनिश्चित तरीके से फैलती है।

  1. क्लस्टर चेन (Cluster Chain):

इसमें एक व्यक्ति कुछ चुने हुए व्यक्तियों को जानकारी देता है, और वे आगे इसे फैलाते हैं।

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अनौपचारिक संचार के लाभ (Advantages of Informal Communication)

  1. तेज़ गति से सूचना का प्रसार:
    यह औपचारिक संचार की तुलना में तेज़ होता है।

  2. सहजता और लचीलापन:
    इसमें किसी प्रकार की औपचारिकता नहीं होती, जिससे लोग अधिक खुलकर बात कर सकते हैं।

  3. मानव संबंधों को मज़बूत बनाता है:
    यह कर्मचारियों के बीच मित्रता, विश्वास और सहयोग की भावना को बढ़ाता है।

  4. प्रबंधन के लिए सहायक:
    इससे प्रबंधन को कर्मचारियों की वास्तविक सोच और भावनाएँ जानने में मदद मिलती है।

  5. तनाव कम करता है:
    यह कर्मचारियों को अपनी भावनाएँ व्यक्त करने का अवसर देता है, जिससे उनका तनाव कम होता है।

अनौपचारिक संचार की सीमाएँ (Limitations of Informal Communication)

  1. अफवाहों का खतरा:
    इसमें गलत या अधूरी जानकारी तेजी से फैल सकती है।

  2. नियंत्रण का अभाव:
    यह किसी निर्धारित नियम या दिशा का पालन नहीं करता, जिससे इसे नियंत्रित करना कठिन होता है।

  3. सत्यता की कमी:
    इसमें जानकारी की पुष्टि नहीं होती, जिससे भ्रम या गलतफहमी पैदा हो सकती है।

  4. संगठनात्मक अनुशासन पर असर:
    कभी-कभी यह अनुशासनहीनता या असंतोष का कारण बन सकता है।

अनौपचारिक संचार के उदाहरण (Examples of Informal Communication)

  • कर्मचारियों के बीच चाय या लंच ब्रेक के दौरान बातचीत।

  • दोस्तों के बीच ऑफिस की नीतियों पर चर्चा।

  • व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की गई जानकारी।

  • कैफेटेरिया या कॉरिडोर में हुई अनौपचारिक मीटिंग।

औपचारिक संचार (Formal Communication): एक विस्तृत समझ

औपचारिक और अनौपचारिक संचार में अंतर (The Difference Between Formal and Informal Communication)

पहलूऔपचारिक संचारअनौपचारिक संचार
नियम और प्रक्रियानिश्चित और आधिकारिकलचीला और स्वतःस्फूर्त
भाषाऔपचारिक और पेशेवरसामान्य और व्यक्तिगत
गतिधीमीतेज़
नियंत्रणप्रबंधन द्वारा नियंत्रितकिसी के नियंत्रण में नहीं
उदाहरणरिपोर्ट, ईमेल, मीटिंगचाय पर चर्चा, ग्रुप चैट

निष्कर्ष (Conclusion)

अनौपचारिक संचार किसी भी संगठन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कर्मचारियों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करता है, टीम भावना को बढ़ाता है और संगठन की कार्यक्षमता को परोक्ष रूप से बढ़ाता है। हालांकि इसमें कुछ सीमाएँ भी होती हैं, लेकिन अगर इसका सही उपयोग किया जाए तो यह संगठन के लिए बहुत लाभकारी हो सकता है।

इसलिए, प्रबंधन को चाहिए कि वह अनौपचारिक संचार को पूरी तरह नकारने के बजाय इसे समझे और उचित दिशा में उपयोग करे।

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Informal Communication – FAQs (अनौपचारिक संचार : अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

अनौपचारिक संचार (Informal Communication) क्या है?

अनौपचारिक संचार वह संचार है जो संगठन के नियमों और आधिकारिक चैनलों के बिना स्वाभाविक रूप से होता है।

क्योंकि यह जानकारी एक व्यक्ति से दूसरे तक तेजी से और अनौपचारिक रूप में फैलती है, ठीक अंगूर की बेल (Grapevine) की तरह।

यह तेज़, लचीला, व्यक्तिगत और बिना औपचारिक रिकॉर्ड के होता है।

चाय-ब्रेक पर बातचीत, फोन कॉल, व्हाट्सएप चैट, मित्रवत चर्चा और सोशल मीडिया मैसेज इसके उदाहरण हैं।

यह कर्मचारियों के बीच संबंध मजबूत करता है, तनाव कम करता है और सूचना तेजी से फैलाता है।

गलत जानकारी फैलने, अफवाहों और नियंत्रण की कमी इसकी प्रमुख सीमाएँ हैं।

अनौपचारिक संचार बिना नियमों के होता है, जबकि औपचारिक संचार निश्चित नियमों और चैनलों के माध्यम से किया जाता है।

यह कर्मचारियों की भावनाओं को समझने, मनोबल बढ़ाने और मैनेजमेंट को फीडबैक देने में सहायक होता है।

हाँ, यदि इस पर नियंत्रण न हो तो यह अफवाह और गलतफहमी का कारण बन सकता है।

खुले संवाद, पारदर्शिता और सही समय पर औपचारिक जानकारी देकर अनौपचारिक संचार को सकारात्मक बनाया जा सकता है।

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