LLP Act, 2008: Limited Liability Partnership Act हिन्‍दी में

llp act 2008

आज के समय में भारत में व्यवसाय शुरू करने के लिए कई प्रकार की कानूनी संरचनाएँ (Business Structures) उपलब्ध हैं, जैसे Sole Proprietorship, Partnership Firm, Limited Liability Partnership (LLP), One Person Company (OPC) और Private Limited Company। इनमें Limited Liability Partnership (LLP) एक ऐसी संरचना है जो पारंपरिक साझेदारी (Partnership) की सरलता और कंपनी (Company) की सीमित देयता (Limited Liability) दोनों का लाभ प्रदान करती है।

भारत में LLP को कानूनी मान्यता देने और उसके गठन, संचालन, अधिकारों एवं दायित्वों को विनियमित करने के लिए Limited Liability Partnership Act, 2008 (LLP Act, 2008) बनाया गया। यह अधिनियम भारत में आधुनिक व्यवसायों, स्टार्टअप्स और प्रोफेशनल सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि LLP Act, 2008 क्या है, इसका उद्देश्य, प्रमुख विशेषताएँ, महत्वपूर्ण प्रावधान, पंजीकरण प्रक्रिया, अनुपालन, लाभ, दंड और अन्य संबंधित विषय क्या हैं।

Table of Contents

सीमित दायित्व साझेदारी (LLP) क्या है?

LLP एक ऐसा व्यवसायिक स्वरूप है जिसमें –

  • यह साझेदारी (Partnership) की तरह लचीला होता है,

  • लेकिन कंपनी (Company) की तरह सीमित दायित्व का लाभ देता है।

LLP में प्रत्येक साझेदार की जिम्मेदारी केवल उसकी पूंजी योगदान (Capital Contribution) तक सीमित होती है। यदि LLP को नुकसान होता है या उस पर कोई ऋण बकाया होता है, तो साझेदारों की व्यक्तिगत संपत्ति उससे प्रभावित नहीं होती।

LLP की कानूनी परिभाषा

LLP एक ऐसी साझेदारी है जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर व्यवसाय करते हैं, लेकिन प्रत्येक पार्टनर की जिम्मेदारी उसके द्वारा किए गए योगदान (Contribution) तक सीमित रहती है।

LLP Act, 2008 क्या है?

Limited Liability Partnership Act, 2008 भारत की संसद द्वारा पारित एक केंद्रीय कानून है, जो Limited Liability Partnership (LLP) के गठन, पंजीकरण, संचालन, प्रबंधन, अधिकारों, दायित्वों, अनुपालन (Compliance) और समाप्ति (Winding Up) से संबंधित नियमों को निर्धारित करता है।

यह अधिनियम पारंपरिक साझेदारी और कंपनी के बीच एक संतुलित व्यवसायिक ढाँचा प्रदान करता है, जिसमें—

  • साझेदारों की देयता सीमित होती है।
  • LLP का अपना अलग कानूनी अस्तित्व होता है।
  • व्यवसाय का संचालन अधिक लचीला होता है।
  • अनुपालन (Compliance) अपेक्षाकृत सरल होते हैं।

LLP Act का इतिहास

भारत में लंबे समय तक व्यवसाय मुख्यतः Indian Partnership Act, 1932 और Companies Act के अंतर्गत संचालित होते थे। लेकिन जैसे-जैसे सेवा क्षेत्र (Service Sector), प्रोफेशनल फर्म और स्टार्टअप्स का विस्तार हुआ, एक ऐसी संरचना की आवश्यकता महसूस हुई जो—

  • साझेदारी की सरलता प्रदान करे,
  • कंपनी जैसी सीमित देयता उपलब्ध कराए,
  • और छोटे एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए उपयुक्त हो।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए Limited Liability Partnership Act, 2008 बनाया गया। यह अधिनियम 7 जनवरी 2009 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद लागू हुआ और 31 मार्च 2009 से प्रभावी रूप से लागू किया गया।

LLP Act, 2008 की मुख्य विशेषताएँ

  1. कानूनी इकाई का दर्जा (Separate Legal Entity)

    • LLP को कंपनी की तरह एक स्वतंत्र कानूनी इकाई माना जाता है।

    • यह अपने नाम से संपत्ति खरीद सकता है, मुकदमा दायर कर सकता है या मुकदमा झेल सकता है।

  2. सीमित दायित्व (Limited Liability)

    • साझेदार केवल अपने निवेश तक ही जिम्मेदार होते हैं।

    • व्यक्तिगत संपत्ति सुरक्षित रहती है।

  3. साझेदारी का लचीलापन (Flexibility of Partnership)

    • LLP समझौते के अनुसार साझेदार अपने अधिकार और कर्तव्यों को स्वतंत्र रूप से तय कर सकते हैं।

    • प्रबंधन में ज्यादा नियमबद्धता नहीं है, जिससे संचालन सरल होता है।

  4. न्यूनतम साझेदार (Minimum Partners)

    • LLP शुरू करने के लिए न्यूनतम दो साझेदार जरूरी हैं।

    • अधिकतम साझेदारों की कोई सीमा नहीं है।

  5. अनिवार्य पंजीकरण (Mandatory Registration)

    • LLP का पंजीकरण कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) के अंतर्गत कराया जाता है।

    • पंजीकरण के बाद इसे एक LLPIN (Limited Liability Partnership Identification Number) मिलता है।

  6. न्यूनतम पूंजी की आवश्यकता नहीं (No Minimum Capital Requirement)

    • LLP बनाने के लिए किसी निश्चित न्यूनतम पूंजी की आवश्यकता नहीं है।

  7. कराधान (Taxation)

    • LLP को साझेदारी फर्म की तरह कर देना होता है।

    • इस पर कॉर्पोरेट टैक्स नहीं लगता, जिससे कर बचत होती है।

  8. वार्षिक अनुपालन (Annual Compliance)

    • LLP को वार्षिक रिटर्न और वित्तीय विवरण MCA के पास जमा कराने होते हैं।

    • अनुपालन निजी लिमिटेड कंपनी की तुलना में सरल और सस्ता है।

लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप (LLP): की सम्‍पूर्ण जानकारी

LLP Act के अंतर्गत महत्वपूर्ण अवधारणाएँ

  1. Partner (पार्टनर)

जो व्यक्ति LLP में पूंजी लगाता है और व्यवसाय में भागीदारी करता है।

  1. Designated Partner

LLP के प्रबंधन और कानूनी अनुपालन के लिए उत्तरदायी विशेष पार्टनर को Designated Partner कहा जाता है। प्रत्येक LLP में कम से कम दो Designated Partners होने चाहिए और उनमें से कम से कम एक भारत का निवासी होना चाहिए।

  1. Contribution

पार्टनर्स द्वारा LLP में किया गया पूंजी निवेश, जो नकद, संपत्ति, बौद्धिक संपदा या अन्य स्वीकृत रूप में हो सकता है।

  1. LLP Agreement

यह LLP का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जिसमें पार्टनर्स के अधिकार, दायित्व, लाभ-हानि का अनुपात, प्रबंधन, विवाद समाधान और अन्य नियम निर्धारित किए जाते हैं।

LLP Act, 2008 के उद्देश्य

LLP Act, 2008 के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

  1. सीमित देयता प्रदान करना

पार्टनर्स की व्यक्तिगत संपत्ति को व्यवसाय के ऋणों और दायित्वों से सुरक्षित रखना।

  1. आधुनिक व्यवसायिक संरचना उपलब्ध कराना

स्टार्टअप्स, प्रोफेशनल्स और MSMEs को एक लचीला और सुरक्षित व्यवसायिक ढाँचा प्रदान करना।

  1. उद्यमिता को बढ़ावा देना

कम अनुपालन और सरल प्रबंधन के माध्यम से नए व्यवसायों की स्थापना को प्रोत्साहित करना।

  1. निवेशकों का विश्वास बढ़ाना

अलग कानूनी अस्तित्व और पंजीकृत संरचना के कारण व्यवसाय की विश्वसनीयता बढ़ती है।

  1. व्यवसाय संचालन में लचीलापन

पार्टनर्स को LLP Agreement के माध्यम से अपने संचालन के नियम तय करने की स्वतंत्रता देना।

LLP का गठन (Formation of LLP)

LLP बनाने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं—

  1. Digital Signature Certificate (DSC) प्राप्त करना।
  2. Designated Partner Identification Number (DPIN/DIN) प्राप्त करना।
  3. LLP के नाम का आरक्षण (Name Reservation)।
  4. Registrar of Companies (ROC) के समक्ष Incorporation आवेदन दाखिल करना।
  5. Certificate of Incorporation प्राप्त करना।
  6. LLP Agreement तैयार कर निर्धारित समय सीमा में दाखिल करना।
  7. PAN, TAN और बैंक खाता खुलवाना।

LLP Agreement का महत्व

LLP Agreement व्यवसाय का संचालन करने वाला प्रमुख दस्तावेज़ है। इसमें सामान्यतः निम्नलिखित बातें शामिल होती हैं—

  • व्यवसाय का उद्देश्य
  • पूंजी योगदान
  • लाभ एवं हानि का वितरण
  • पार्टनर्स के अधिकार एवं दायित्व
  • नए पार्टनर का प्रवेश
  • पार्टनर का इस्तीफा या निष्कासन
  • विवाद समाधान की प्रक्रिया
  • बैंक संचालन
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया

यदि LLP Agreement नहीं बनाया जाता, तो अधिनियम और उससे संबंधित नियमों के डिफ़ॉल्ट प्रावधान लागू हो सकते हैं।

पार्टनर्स के अधिकार

LLP Agreement और कानून के अनुसार पार्टनर्स को सामान्यतः निम्न अधिकार प्राप्त होते हैं—

  • व्यवसाय के प्रबंधन में भाग लेना।
  • लाभ में हिस्सा प्राप्त करना।
  • व्यवसाय से संबंधित जानकारी प्राप्त करना।
  • महत्वपूर्ण निर्णयों में भाग लेना।
  • निर्धारित शर्तों के अनुसार LLP छोड़ना।

पार्टनर्स के दायित्व

पार्टनर्स के कुछ प्रमुख दायित्व हैं—

  • LLP Agreement का पालन करना।
  • ईमानदारी और सद्भावना से कार्य करना।
  • कानूनों का पालन सुनिश्चित करना।
  • गलत या धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों से बचना।
  • आवश्यक अभिलेख और जानकारी उपलब्ध कराना।

LLP की वार्षिक अनुपालन (Annual Compliance)

LLP को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कई वैधानिक अनुपालन पूरे करने होते हैं, जैसे—

  • वार्षिक रिटर्न दाखिल करना।
  • Statement of Account and Solvency दाखिल करना।
  • आयकर रिटर्न जमा करना।
  • आवश्यक होने पर GST रिटर्न दाखिल करना।
  • लेखा अभिलेखों का रखरखाव।

समय पर अनुपालन न करने पर अतिरिक्त शुल्क और दंड लगाया जा सकता है।

लेखा और ऑडिट

LLP को उचित लेखा-पुस्तकें बनाए रखना आवश्यक है। कुछ निर्धारित परिस्थितियों (जैसे टर्नओवर या पूंजी योगदान की सीमा) में ऑडिट कराना भी आवश्यक हो सकता है।

धोखाधड़ी (Fraud) और दंड

यदि कोई पार्टनर या LLP धोखाधड़ी, गलत जानकारी या कानून के उल्लंघन में संलिप्त पाया जाता है, तो LLP Act के अंतर्गत जुर्माना, दंड और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में आपराधिक दायित्व भी उत्पन्न हो सकते हैं।

LLP का विघटन (Winding Up)

LLP का समापन निम्न परिस्थितियों में हो सकता है—

  • पार्टनर्स की आपसी सहमति से।
  • न्यायाधिकरण (Tribunal) के आदेश से।
  • कानून के उल्लंघन या अन्य वैधानिक कारणों से।
  • निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्वैच्छिक या वैधानिक समापन।

सीमित दायित्व साझेदारी अधिनियम (LLP Act), 2008 की धाराएँ (Sections)

LLP Act (अधिनियम), 2008 कुल 14 अध्याय (Chapters) और लगभग 81 धाराओं (Sections) में विभाजित है। नीचे प्रमुख धाराओं का संक्षिप्त विवरण दिया गया है –

अध्याय 1 – प्रारंभिक (Preliminary) [धारा 1-2]

  • धारा 1 – अधिनियम का संक्षिप्त नाम, विस्तार और लागू होने की तिथि बताती है।

  • धारा 2 – अधिनियम में प्रयुक्त महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषाएँ (जैसे – LLP, नामित साझेदार, वित्तीय वर्ष आदि)।

अध्याय 2 – सीमित दायित्व साझेदारी का गठन (Incorporation) [धारा 3-10]

  • धारा 3 – LLP एक स्वतंत्र कानूनी इकाई है और इसके दायित्व साझेदारों से अलग होते हैं।

  • धारा 4 – LLP अधिनियम और अन्य कानूनों का आपसी संबंध।

  • धारा 5 – न्यूनतम दो साझेदारों की आवश्यकता।

  • धारा 6 – LLP में साझेदार बनने/रुकने के प्रावधान।

  • धारा 7-10 – नामित साझेदारों की नियुक्ति, जिम्मेदारियाँ और पंजीकरण की प्रक्रिया।

अध्याय 3 – सीमित दायित्व साझेदारी समझौता (LLP Agreement) [धारा 11-12]

  • धारा 11 – LLP के गठन के लिए आवश्यक दस्तावेज और पंजीकरण प्रक्रिया।

  • धारा 12 – पंजीकरण प्रमाणपत्र (Certificate of Incorporation) जारी करने की प्रक्रिया।

अध्याय 4 – साझेदार और उनके संबंध (Partners and Their Relations) [धारा 22-25]

  • धारा 22 – साझेदारों की आपसी जिम्मेदारियाँ।

  • धारा 23 – LLP समझौते के अंतर्गत साझेदारों के अधिकार और कर्तव्य।

  • धारा 24 – साझेदारी से त्यागपत्र और बदलाव की सूचना।

  • धारा 25 – साझेदारों की जानकारी का रख-रखाव।

अध्याय 5 – सीमित दायित्व (Extent of Liability) [धारा 26-30]

  • धारा 26 – LLP अपने कार्यों के लिए स्वयं जिम्मेदार है।

  • धारा 27 – LLP के अनुबंध और कार्यों की वैधता।

  • धारा 28 – साझेदार की सीमित जिम्मेदारी।

  • धारा 29 – गलत प्रस्तुति (Misrepresentation) की स्थिति में दायित्व।

  • धारा 30 – धोखाधड़ी (Fraud) के मामलों में असीमित दायित्व।

अध्याय 6 – योगदान (Contribution) [धारा 32-33]

  • धारा 32 – साझेदारों का पूंजी योगदान।

  • धारा 33 – योगदान की प्रकृति (नकद, संपत्ति, सेवाएँ इत्यादि)।

अध्याय 7 – वित्तीय प्रकटीकरण (Financial Disclosures) [धारा 34-40]

  • धारा 34 – खातों का रख-रखाव और वार्षिक विवरण।

  • धारा 35 – रिटर्न दाखिल करने का प्रावधान।

  • धारा 36 – साझेदारों को पुस्तकों की जाँच का अधिकार।

  • धारा 37-40 – वित्तीय रिपोर्टिंग और सरकारी निरीक्षण से संबंधित प्रावधान।

अध्याय 8 – LLP का परिवर्तन (Conversion) [धारा 55-58]

  • धारा 55 – पारंपरिक साझेदारी को LLP में बदलने का प्रावधान।

  • धारा 56 – निजी कंपनी से LLP में परिवर्तन।

  • धारा 57 – अनलिस्टेड पब्लिक कंपनी से LLP में परिवर्तन।

  • धारा 58 – परिवर्तन की प्रक्रिया और परिणाम।

अध्याय 9 – विदेशी LLP (Foreign LLP) [धारा 59]

  • धारा 59 – भारत में विदेशी LLP का पंजीकरण और संचालन से संबंधित प्रावधान।

अध्याय 10 – समझौता एवं पुनर्निर्माण (Compromise, Arrangement, Reconstruction) [धारा 60-62]

  • धारा 60 – LLP का आपसी समझौता।

  • धारा 61 – LLP के पुनर्गठन की प्रक्रिया।

  • धारा 62 – LLP का विलय (Amalgamation)।

अध्याय 11 – विघटन और समाप्ति (Winding Up & Dissolution) [धारा 63-65]

  • धारा 63 – LLP को स्वेच्छा से बंद करने की प्रक्रिया।

  • धारा 64 – न्यायालय द्वारा विघटन के कारण।

  • धारा 65 – विघटन की विधि।

अध्याय 12 – दंड और दायित्व (Penalties) [धारा 74-80]

  • LLP अधिनियम के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान।

  • समय पर रिटर्न न भरने या नियमों का पालन न करने पर जुर्माना।

अध्याय 13 – विविध (Miscellaneous) [धारा 81]

  • LLP अधिनियम से संबंधित नियम बनाने का अधिकार केंद्र सरकार को।

सीमित दायित्व साझेदारी अधिनियम (LLP Act), 2008 में दी गई धाराएँ LLP के गठन, संचालन, वित्तीय अनुशासन, परिवर्तन और विघटन से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को कानूनी मान्यता देती हैं। इससे LLP न केवल उद्यमियों के लिए सुरक्षित और सरल व्यवसाय मॉडल बनता है, बल्कि निवेशकों और ग्राहकों के बीच विश्वसनीयता और पारदर्शिता भी लाता है।

LLP Act और Partnership Act में अंतर

आधारLLP Act, 2008Partnership Act, 1932
कानूनी इकाईअलग कानूनी अस्तित्वअलग कानूनी अस्तित्व नहीं
देयतासीमितअसीमित
पंजीकरणअनिवार्यकई मामलों में वैकल्पिक
संपत्तिLLP के नाम परसाझेदारों के नाम से जुड़ी हो सकती है
निरंतरतास्थायीपार्टनर बदलने पर प्रभाव पड़ सकता है
कानूनLLP ActPartnership Act

LLP स्थापित करने की प्रक्रिया

The process of establishing an LLP
  1. नाम आरक्षण (Name Reservation) – MCA पोर्टल पर LLP का नाम आरक्षित करना।

  2. डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) – साझेदारों के लिए DSC प्राप्त करना।

  3. डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) – नामित साझेदारों के लिए DIN लेना।

  4. फॉर्म भरना और जमा करना – LLP Incorporation Form भरकर MCA पोर्टल पर जमा करना।

  5. LLPIN प्राप्त करना – पंजीकरण सफल होने पर LLP को एक अद्वितीय नंबर मिलता है।

  6. LLP समझौता (LLP Agreement) – साझेदारों के बीच अधिकारों और कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए समझौता बनाना।

लिमिटेड लाइबिलिटी कंपनी (LLC) : एक संपूर्ण परिचय

LLP किन व्यवसायों के लिए उपयुक्त है?

LLP निम्न प्रकार के व्यवसायों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती है—

  • स्टार्टअप्स
  • आईटी कंपनियाँ
  • डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियाँ
  • चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) फर्म
  • वकीलों की फर्म
  • कंसल्टेंसी सेवाएँ
  • आर्किटेक्ट और इंजीनियरिंग फर्म
  • डिज़ाइन स्टूडियो
  • शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान
  • प्रोफेशनल सेवा प्रदाता

उदाहरण

मान लीजिए राहुल और अमित मिलकर एक आईटी कंसल्टेंसी व्यवसाय शुरू करते हैं और LLP बनाते हैं। दोनों ₹10-10 लाख का योगदान करते हैं। यदि व्यवसाय को वित्तीय नुकसान होता है या LLP पर कोई देयता आती है, तो सामान्य परिस्थितियों में उनकी व्यक्तिगत संपत्ति सुरक्षित रहती है और उनकी जिम्मेदारी LLP में किए गए योगदान तथा लागू कानून के अनुसार निर्धारित होती है। यही LLP Act का सबसे महत्वपूर्ण लाभ है।

LLP के लाभ

  • सीमित दायित्व का सुरक्षा कवच

  • लचीलापन और सरल अनुपालन

  • अलग कानूनी इकाई का दर्जा

  • निवेशकों और बैंकों से विश्वसनीयता

  • कर बचत और कम अनुपालन लागत

LLP की कमियाँ

  • बाहरी निवेशकों (जैसे वेंचर कैपिटल) के लिए यह उतना आकर्षक नहीं है, जितना निजी लिमिटेड कंपनी।

  • कुछ मामलों में, अनुपालन न करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

  • शेयर जारी करने की अनुमति नहीं है, जिससे बड़ी पूंजी जुटाने में कठिनाई हो सकती है।

निष्कर्ष

Limited Liability Partnership Act, 2008 भारत में आधुनिक व्यवसायों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढाँचा है। यह अधिनियम साझेदारी की सरलता और कंपनी जैसी सीमित देयता का संतुलित संयोजन प्रदान करता है। अलग कानूनी अस्तित्व, सीमित देयता, लचीला प्रबंधन और अपेक्षाकृत कम अनुपालन के कारण LLP आज स्टार्टअप्स, प्रोफेशनल फर्मों और सेवा-आधारित व्यवसायों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

हालाँकि, LLP का गठन करने से पहले व्यवसाय की प्रकृति, भविष्य की विस्तार योजनाएँ, निवेश की आवश्यकता और कानूनी अनुपालन का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए। सही व्यवसायिक संरचना का चयन न केवल कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि व्यवसाय की दीर्घकालिक सफलता और विकास की मजबूत नींव भी रखता है।

एकल स्वामित्व (Sole Proprietorship) पर विस्तृत लेख

LLP Act, 2008 – FAQs

LLP Act, 2008 क्या है?

LLP Act, 2008 वह कानून है जो भारत में Limited Liability Partnership (LLP) के गठन, संचालन और विघटन को नियंत्रित करता है।

यह अधिनियम वर्ष 2008 में पारित हुआ और बाद में लागू किया गया।

इस अधिनियम का उद्देश्य साझेदारी और कंपनी के लाभों को मिलाकर एक लचीला और सुरक्षित व्यवसायिक ढांचा प्रदान करना है।

LLP को एक अलग कानूनी इकाई (Separate Legal Entity) का दर्जा प्राप्त होता है।

LLP बनाने के लिए न्यूनतम 2 भागीदार आवश्यक होते हैं।

इस अधिनियम के अंतर्गत भागीदारों की देयता सीमित (Limited) होती है।

LLP Agreement भागीदारों के अधिकार, कर्तव्य और आपसी संबंधों को निर्धारित करता है और यह अधिनियम के तहत वैध होता है।

हाँ, LLP Act, 2008 के अनुसार LLP का पंजीकरण अनिवार्य है।

जब LLP का टर्नओवर या योगदान निर्धारित सीमा से अधिक हो, तब ऑडिट अनिवार्य होता है।

हाँ, अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार LLP का नाम बदला जा सकता है।

हाँ, नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और दंड का प्रावधान है।

यह अधिनियम स्टार्टअप्स, प्रोफेशनल फर्म्स और छोटे-मध्यम व्यवसायों के लिए उपयुक्त है।

हाँ। LLP एक अलग कानूनी इकाई है।

सामान्य परिस्थितियों में हाँ, क्योंकि देयता सीमित होती है।

नहीं। LLP शेयर जारी नहीं कर सकती है।

हाँ, यह व्यवसाय के संचालन का मूल दस्तावेज़ है।

हाँ, LLP पर आयकर अधिनियम के अनुसार कर लगाया जाता है।

हाँ, निर्धारित वैधानिक रिटर्न समय पर दाखिल करना आवश्यक है।

LLP में शेयर पूंजी नहीं होती और इसका प्रबंधन पार्टनर्स द्वारा किया जाता है, जबकि Private Limited Company में शेयरधारक और निदेशक (Directors) होते हैं तथा अनुपालन अपेक्षाकृत अधिक होते हैं।

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