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भारत में कामगारों और नियोक्ताओं (Employers) के बीच संबंधों को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न श्रम कानून या लेबर लॉ (Labour Laws) बनाए गए हैं। इन कानूनों का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना, कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाना और नियोक्ता एवं कर्मचारी के बीच संतुलन स्थापित करना है।
जब हम Labour Law Bare Act (लेबर लॉ बेयर एक्ट) की बात करते हैं, तो इसका अर्थ होता है – श्रम कानून का वास्तविक और मूल रूप (text of law) जिसे सरकार ने अधिनियमित (enact) किया है। “बेयर एक्ट” का मतलब है कि इसमें केवल कानून की धाराएँ और प्रावधान होते हैं, न कि उनकी व्याख्या या टिप्पणी।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि Labour Law Bare Act क्या है, इसकी विशेषताएँ, महत्त्व, और भारत में लागू प्रमुख श्रम कानून कौन-कौन से हैं।
Table of Contents
Toggleबेयर एक्ट (Bare Act) क्या है?
बेयर एक्ट किसी भी कानून का शुद्ध और मूल स्वरूप होता है।
इसमें केवल वही शब्द लिखे होते हैं जो संसद या विधानमंडल ने पारित किए हैं।
इसमें किसी लेखक या विशेषज्ञ की व्याख्या, उदाहरण या टिप्पणी नहीं होती।
उदाहरण: Factories Act, 1948 (Bare Act) या Minimum Wages Act, 1948 (Bare Act)
लेबर लॉ बेयर एक्ट का महत्त्व
कानूनी स्पष्टता – यह कानून की वास्तविक भाषा को प्रस्तुत करता है।
छात्रों के लिए उपयोगी – लॉ स्टूडेंट्स, CA, CS और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए यह जरूरी है।
व्यवसायिक जगत में सहायक – HR मैनेजर, वकील और उद्योगपति इसे देखकर अपने निर्णय लेते हैं।
न्यायालय में संदर्भ – किसी केस में जब न्यायालय निर्णय लेता है, तो सबसे पहले बेयर एक्ट की भाषा पर ही ध्यान दिया जाता है।
भारत में प्रमुख लेबर लॉ बेयर एक्ट
भारत में लगभग 40 से अधिक श्रम कानून थे, जिन्हें हाल ही में सरल और संगठित करने के लिए चार लेबर कोड (Labour Codes) में बदल दिया गया है। लेकिन पारंपरिक बेयर एक्ट अभी भी अध्ययन और न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पारंपरिक (Old) लेबर लॉ बेयर एक्ट
Factories Act, 1948
Minimum Wages Act, 1948
Payment of Wages Act, 1936
Payment of Bonus Act, 1965
Employees Provident Fund Act, 1952
Employees State Insurance Act, 1948
Industrial Disputes Act, 1947
Trade Unions Act, 1926
Maternity Benefit Act, 1961
Equal Remuneration Act, 1976
स्पष्टीकरण (Explanation)
- Factories Act, 1948
- उद्देश्य: फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाना।
- इसमें काम के घंटे, छुट्टियाँ, मशीनों से सुरक्षा, बच्चों और महिलाओं के काम करने के नियम शामिल हैं।
2. Minimum Wages Act, 1948
- उद्देश्य: हर श्रमिक को न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) सुनिश्चित करना।
- नियोक्ता मजदूर को सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतन से कम भुगतान नहीं कर सकते।
3. Payment of Wages Act, 1936
- उद्देश्य: श्रमिकों को समय पर और पूरा वेतन दिलाना।
- इसमें वेतन भुगतान की तारीख और भुगतान की विधि (कैश/बैंक) तय की गई है।
4. Payment of Bonus Act, 1965
- उद्देश्य: नियोक्ता को लाभ होने पर श्रमिकों को बोनस देना।
- 8.33% से 20% तक बोनस भुगतान का प्रावधान है।
5. Employees Provident Fund Act, 1952 (EPF)
- उद्देश्य: कर्मचारियों की लंबी अवधि की बचत सुनिश्चित करना।
- इसमें नियोक्ता और कर्मचारी दोनों वेतन का एक हिस्सा PF खाते में जमा करते हैं।
6. Employees State Insurance Act, 1948 (ESI)
- उद्देश्य: कर्मचारियों को बीमा सुविधा देना।
- इसमें बीमारी, मातृत्व, दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में आर्थिक मदद और मेडिकल सुविधा मिलती है।
7. Industrial Disputes Act, 1947
- उद्देश्य: उद्योगों में श्रमिक और नियोक्ता के बीच विवाद (जैसे हड़ताल, तालाबंदी, छंटनी) का समाधान करना।
- इसमें सुलह अधिकारी, औद्योगिक न्यायाधिकरण आदि की व्यवस्था है।
8. Trade Unions Act, 1926
- उद्देश्य: श्रमिक संगठनों (यूनियनों) को कानूनी मान्यता देना।
- इससे मजदूर सामूहिक रूप से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।
9. Maternity Benefit Act, 1961
- उद्देश्य: गर्भवती महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश और आर्थिक लाभ देना।
- इसमें 26 हफ्तों तक का भुगतान अवकाश दिया जाता है।
10. Equal Remuneration Act, 1976
- उद्देश्य: समान कार्य के लिए महिला और पुरुष को समान वेतन सुनिश्चित करना।
- इसमें लैंगिक भेदभाव पर रोक लगाई गई है।
नए लेबर कोड्स (New Labour Codes – 2020)
Code on Wages, 2019
Code on Social Security, 2020
Industrial Relations Code, 2020
Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020
स्पष्टीकरण (Explanation)
सरकार ने लगभग 40 पुराने लेबर लॉ को मिलाकर 4 बड़े लेबर कोड्स बनाए, ताकि कानून सरल और आधुनिक हो सकें।
1. Code on Wages, 2019
- पुराने कानून जैसे Minimum Wages Act, Payment of Wages Act, Bonus Act आदि को मिलाकर बनाया गया।
- इसमें देशभर के सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन, समय पर वेतन भुगतान और बोनस का प्रावधान है।
2. Code on Social Security, 2020
- इसमें EPF, ESI, Maternity Benefit, Gratuity आदि को मिलाया गया।
- उद्देश्य: हर कर्मचारी को पेंशन, PF, बीमा, मातृत्व लाभ जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएँ देना।
3. Industrial Relations Code, 2020
- इसमें Trade Union Act, Industrial Disputes Act को जोड़ा गया।
- उद्देश्य: श्रमिक और नियोक्ता के बीच सामंजस्य और विवादों का सरल समाधान करना।
- हड़ताल और छंटनी से जुड़े नियमों को सरल किया गया।
4. Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020
- इसमें Factories Act, Contract Labour Act, Mines Act आदि कानून शामिल किए गए।
- उद्देश्य: कामगारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, कार्य-घंटे और काम की शर्तों को बेहतर बनाना।
पुराने लेबर लॉ कई अलग-अलग अधिनियमों में बंटे हुए थे, जिससे नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को पालन में कठिनाई होती थी। नए लेबर कोड्स (2020) ने इन्हें सरल और एकीकृत कर दिया है। अब कर्मचारी अधिकार अधिक स्पष्ट और नियोक्ताओं के लिए अनुपालन आसान है।
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पुराने लेबर लॉ बनाम नए लेबर कोड्स : तुलनात्मक तालिका
यहाँ “लेबर लॉ बेयर एक्ट” में “पुराने लेबर लॉ बनाम नए लेबर कोड्स” की तुलना तालिका जोड़ दी गई है:
| पहलू (Aspect) | पुराने लेबर लॉ (Old Labour Laws) | नए लेबर कोड्स (New Labour Codes – 2020) |
|---|---|---|
| संख्या | लगभग 40 से अधिक अलग-अलग कानून | केवल 4 एकीकृत लेबर कोड |
| जटिलता | बहुत अधिक जटिल और अलग-अलग धाराएँ | सरल, एकीकृत और समझने में आसान |
| मुख्य विषय | वेतन, बोनस, औद्योगिक विवाद, ESI, PF, फैक्ट्री, ट्रेड यूनियन आदि | वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा |
| प्रशासनिक बोझ | नियोक्ताओं को अलग-अलग कानूनों का पालन करना पड़ता था | एकीकृत कोड्स से अनुपालन आसान हुआ |
| कामगारों के अधिकार | अधिकार बिखरे हुए कानूनों में फैले हुए थे | सभी अधिकार एकीकृत रूप में स्पष्ट |
| डिजिटलीकरण | पुराने कानूनों में डिजिटल प्रावधान बहुत कम थे | ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, ई-फाइलिंग जैसे प्रावधान शामिल |
| लचीलापन | उद्योगों के लिए कम लचीलापन | निवेश को प्रोत्साहित करने और कामगार सुरक्षा का संतुलन |
बेयर एक्ट पढ़ने का सही तरीका
पहले प्रांरभिक अध्याय (Preliminary Chapter) को ध्यान से पढ़ें।
प्रत्येक धारा (Section) को शब्दशः समझने का प्रयास करें।
परिभाषाएँ (Definitions) हमेशा याद रखें क्योंकि पूरा कानून इन्हीं पर आधारित होता है।
Bare Act को पढ़ते समय नोट्स बनाना और उदाहरण खोजना आसान बनाता है।
निष्कर्ष
Labour Law Bare Act (लेबर लॉ बेयर एक्ट) कामगारों और नियोक्ताओं के बीच संबंधों को व्यवस्थित करने वाला मूल कानूनी दस्तावेज है। चाहे आप कानून के छात्र हों, एक वकील हों, HR प्रोफेशनल हों या उद्यमी—आपके लिए बेयर एक्ट की जानकारी होना बेहद आवश्यक है। यह कानूनों को उनकी सबसे शुद्ध और वास्तविक भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे किसी भी भ्रम की संभावना नहीं रहती।
अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं या लॉ स्टडीज की तैयारी कर रहे हैं, तो लेबर लॉ बेयर एक्ट की कॉपी अवश्य रखें और नियमित रूप से पढ़ें।
5 Major Types of Contract in Business Law: अनुबंधों के प्रकार
Labour Law Bare Act – FAQs
Labour Law Bare Act क्या होता है?
Labour Law Bare Act उन मूल श्रम कानूनों का शुद्ध और मूल पाठ होता है, जिसमें केवल अधिनियम की धाराएँ होती हैं, व्याख्या नहीं।
Bare Act पढ़ने का उद्देश्य क्या होता है?
Bare Act पढ़ने से कानून की वास्तविक भाषा और कानूनी प्रावधानों को सही रूप में समझा जा सकता है।
Labour Law Bare Act में क्या शामिल होता है?
इसमें श्रम कानूनों की धाराएँ, उपधाराएँ, परिभाषाएँ और अनुसूचियाँ शामिल होती हैं।
Labour Law Bare Act किसके लिए उपयोगी है?
यह कानून के छात्रों, वकीलों, HR प्रोफेशनल्स और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए उपयोगी होता है।
Labour Law Bare Act और पाठ्य-पुस्तक में क्या अंतर है?
Bare Act में केवल कानून का मूल पाठ होता है, जबकि पुस्तकों में उसकी व्याख्या और उदाहरण दिए जाते हैं।
भारत के प्रमुख Labour Law Bare Acts कौन-से हैं?
Factories Act, Minimum Wages Act, Industrial Disputes Act और Employees’ Provident Fund Act प्रमुख Bare Acts हैं।
क्या परीक्षा में Bare Act से सीधे प्रश्न आते हैं?
हाँ, कई परीक्षाओं में परिभाषाएँ, धाराएँ और कानूनी शब्दावली Bare Act से पूछी जाती हैं।
Labour Law Bare Act कैसे पढ़ना चाहिए?
धाराओं को ध्यान से पढ़ना, महत्वपूर्ण शब्दों को नोट करना और नियमित रिवीजन करना चाहिए।
क्या Labour Law Bare Act ऑनलाइन उपलब्ध होता है?
हाँ, कई सरकारी और शैक्षणिक वेबसाइटों पर Bare Act का पाठ उपलब्ध होता है।
Labour Law Bare Act की जानकारी क्यों जरूरी है?
यह कानूनी समझ को मजबूत बनाता है और श्रम कानूनों के सही अनुपालन में मदद करता है।





