लेबर लॉ बेयर एक्ट (Labour Law Bare Act): 2026 पूरी जानकारी

लेबर लॉ

Photo by Pop & Zebra on Unsplash

भारत में कामगारों और नियोक्ताओं (Employers) के बीच संबंधों को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न श्रम कानून या लेबर लॉ (Labour Laws) बनाए गए हैं। इन कानूनों का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना, कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाना और नियोक्ता एवं कर्मचारी के बीच संतुलन स्थापित करना है।

जब हम Labour Law Bare Act (लेबर लॉ बेयर एक्ट) की बात करते हैं, तो इसका अर्थ होता है – श्रम कानून का वास्तविक और मूल रूप (text of law) जिसे सरकार ने अधिनियमित (enact) किया है। “बेयर एक्ट” का मतलब है कि इसमें केवल कानून की धाराएँ और प्रावधान होते हैं, न कि उनकी व्याख्या या टिप्पणी।

इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि Labour Law Bare Act क्या है, इसकी विशेषताएँ, महत्त्व, और भारत में लागू प्रमुख श्रम कानून कौन-कौन से हैं।

  • बेयर एक्ट किसी भी कानून का शुद्ध और मूल स्वरूप होता है।

  • इसमें केवल वही शब्द लिखे होते हैं जो संसद या विधानमंडल ने पारित किए हैं।

  • इसमें किसी लेखक या विशेषज्ञ की व्याख्या, उदाहरण या टिप्पणी नहीं होती।

  • उदाहरण: Factories Act, 1948 (Bare Act) या Minimum Wages Act, 1948 (Bare Act)

लेबर लॉ बेयर एक्ट का महत्त्व

  1. कानूनी स्पष्टता – यह कानून की वास्तविक भाषा को प्रस्तुत करता है।

  2. छात्रों के लिए उपयोगी – लॉ स्टूडेंट्स, CA, CS और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए यह जरूरी है।

  3. व्यवसायिक जगत में सहायक – HR मैनेजर, वकील और उद्योगपति इसे देखकर अपने निर्णय लेते हैं।

  4. न्यायालय में संदर्भ – किसी केस में जब न्यायालय निर्णय लेता है, तो सबसे पहले बेयर एक्ट की भाषा पर ही ध्यान दिया जाता है।

भारत में प्रमुख लेबर लॉ बेयर एक्ट

भारत में लगभग 40 से अधिक श्रम कानून थे, जिन्हें हाल ही में सरल और संगठित करने के लिए चार लेबर कोड (Labour Codes) में बदल दिया गया है। लेकिन पारंपरिक बेयर एक्ट अभी भी अध्ययन और न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हैं।

पारंपरिक (Old) लेबर लॉ बेयर एक्ट

  1. Factories Act, 1948

  2. Minimum Wages Act, 1948

  3. Payment of Wages Act, 1936

  4. Payment of Bonus Act, 1965

  5. Employees Provident Fund Act, 1952

  6. Employees State Insurance Act, 1948

  7. Industrial Disputes Act, 1947

  8. Trade Unions Act, 1926

  9. Maternity Benefit Act, 1961

  10. Equal Remuneration Act, 1976

Collective Bargaining in Labour Law 2025 हिन्‍दी में समझिएं

स्‍पष्‍टीकरण (Explanation)

  1. Factories Act, 1948
  • उद्देश्य: फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाना।
  • इसमें काम के घंटे, छुट्टियाँ, मशीनों से सुरक्षा, बच्चों और महिलाओं के काम करने के नियम शामिल हैं।

2. Minimum Wages Act, 1948

  • उद्देश्य: हर श्रमिक को न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) सुनिश्चित करना।
  • नियोक्ता मजदूर को सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतन से कम भुगतान नहीं कर सकते।

3. Payment of Wages Act, 1936

  • उद्देश्य: श्रमिकों को समय पर और पूरा वेतन दिलाना।
  • इसमें वेतन भुगतान की तारीख और भुगतान की विधि (कैश/बैंक) तय की गई है।

4. Payment of Bonus Act, 1965

  • उद्देश्य: नियोक्ता को लाभ होने पर श्रमिकों को बोनस देना।
  • 8.33% से 20% तक बोनस भुगतान का प्रावधान है।

5. Employees Provident Fund Act, 1952 (EPF)

  • उद्देश्य: कर्मचारियों की लंबी अवधि की बचत सुनिश्चित करना।
  • इसमें नियोक्ता और कर्मचारी दोनों वेतन का एक हिस्सा PF खाते में जमा करते हैं।

6. Employees State Insurance Act, 1948 (ESI)

  • उद्देश्य: कर्मचारियों को बीमा सुविधा देना।
  • इसमें बीमारी, मातृत्व, दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में आर्थिक मदद और मेडिकल सुविधा मिलती है।

7. Industrial Disputes Act, 1947

  • उद्देश्य: उद्योगों में श्रमिक और नियोक्ता के बीच विवाद (जैसे हड़ताल, तालाबंदी, छंटनी) का समाधान करना।
  • इसमें सुलह अधिकारी, औद्योगिक न्यायाधिकरण आदि की व्यवस्था है।

8. Trade Unions Act, 1926

  • उद्देश्य: श्रमिक संगठनों (यूनियनों) को कानूनी मान्यता देना।
  • इससे मजदूर सामूहिक रूप से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।

9. Maternity Benefit Act, 1961

  • उद्देश्य: गर्भवती महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश और आर्थिक लाभ देना।
  • इसमें 26 हफ्तों तक का भुगतान अवकाश दिया जाता है।

10. Equal Remuneration Act, 1976

  • उद्देश्य: समान कार्य के लिए महिला और पुरुष को समान वेतन सुनिश्चित करना।
  • इसमें लैंगिक भेदभाव पर रोक लगाई गई है।

नए लेबर कोड्स (New Labour Codes – 2020)

New Labour Codes
  1. Code on Wages, 2019

  2. Code on Social Security, 2020

  3. Industrial Relations Code, 2020

  4. Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020

स्‍पष्‍टीकरण (Explanation)

सरकार ने लगभग 40 पुराने लेबर लॉ को मिलाकर 4 बड़े लेबर कोड्स बनाए, ताकि कानून सरल और आधुनिक हो सकें।

1. Code on Wages, 2019

  • पुराने कानून जैसे Minimum Wages Act, Payment of Wages Act, Bonus Act आदि को मिलाकर बनाया गया।
  • इसमें देशभर के सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन, समय पर वेतन भुगतान और बोनस का प्रावधान है।

2. Code on Social Security, 2020

  • इसमें EPF, ESI, Maternity Benefit, Gratuity आदि को मिलाया गया।
  • उद्देश्य: हर कर्मचारी को पेंशन, PF, बीमा, मातृत्व लाभ जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएँ देना।

3. Industrial Relations Code, 2020

  • इसमें Trade Union Act, Industrial Disputes Act को जोड़ा गया।
  • उद्देश्य: श्रमिक और नियोक्ता के बीच सामंजस्य और विवादों का सरल समाधान करना।
  • हड़ताल और छंटनी से जुड़े नियमों को सरल किया गया।

4. Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020

  • इसमें Factories Act, Contract Labour Act, Mines Act आदि कानून शामिल किए गए।
  • उद्देश्य: कामगारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, कार्य-घंटे और काम की शर्तों को बेहतर बनाना।

पुराने लेबर लॉ कई अलग-अलग अधिनियमों में बंटे हुए थे, जिससे नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को पालन में कठिनाई होती थी। नए लेबर कोड्स (2020) ने इन्हें सरल और एकीकृत कर दिया है। अब कर्मचारी अधिकार अधिक स्पष्ट और नियोक्ताओं के लिए अनुपालन आसान है।

भारत में श्रम क़ानून 2025 (Labour Laws in India) और संहिताएं

पुराने लेबर लॉ बनाम नए लेबर कोड्स : तुलनात्मक तालिका

यहाँ “लेबर लॉ बेयर एक्ट” में “पुराने लेबर लॉ बनाम नए लेबर कोड्स” की तुलना तालिका जोड़ दी गई है:

पहलू (Aspect)पुराने लेबर लॉ (Old Labour Laws)नए लेबर कोड्स (New Labour Codes – 2020)
संख्यालगभग 40 से अधिक अलग-अलग कानूनकेवल 4 एकीकृत लेबर कोड
जटिलताबहुत अधिक जटिल और अलग-अलग धाराएँसरल, एकीकृत और समझने में आसान
मुख्य विषयवेतन, बोनस, औद्योगिक विवाद, ESI, PF, फैक्ट्री, ट्रेड यूनियन आदिवेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा
प्रशासनिक बोझनियोक्ताओं को अलग-अलग कानूनों का पालन करना पड़ता थाएकीकृत कोड्स से अनुपालन आसान हुआ
कामगारों के अधिकारअधिकार बिखरे हुए कानूनों में फैले हुए थेसभी अधिकार एकीकृत रूप में स्पष्ट
डिजिटलीकरणपुराने कानूनों में डिजिटल प्रावधान बहुत कम थेऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, ई-फाइलिंग जैसे प्रावधान शामिल
लचीलापनउद्योगों के लिए कम लचीलापननिवेश को प्रोत्साहित करने और कामगार सुरक्षा का संतुलन

बेयर एक्ट पढ़ने का सही तरीका

  1. पहले प्रांरभिक अध्याय (Preliminary Chapter) को ध्यान से पढ़ें।

  2. प्रत्येक धारा (Section) को शब्दशः समझने का प्रयास करें।

  3. परिभाषाएँ (Definitions) हमेशा याद रखें क्योंकि पूरा कानून इन्हीं पर आधारित होता है।

  4. Bare Act को पढ़ते समय नोट्स बनाना और उदाहरण खोजना आसान बनाता है।

Retrenchment in Labour Law (लेबर लॉ में रिट्रेंचमेंट)

निष्कर्ष

Labour Law Bare Act (लेबर लॉ बेयर एक्ट) कामगारों और नियोक्ताओं के बीच संबंधों को व्यवस्थित करने वाला मूल कानूनी दस्तावेज है। चाहे आप कानून के छात्र हों, एक वकील हों, HR प्रोफेशनल हों या उद्यमी—आपके लिए बेयर एक्ट की जानकारी होना बेहद आवश्यक है। यह कानूनों को उनकी सबसे शुद्ध और वास्तविक भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे किसी भी भ्रम की संभावना नहीं रहती।

अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं या लॉ स्टडीज की तैयारी कर रहे हैं, तो लेबर लॉ बेयर एक्ट की कॉपी अवश्य रखें और नियमित रूप से पढ़ें।

5 Major Types of Contract in Business Law: अनुबंधों के प्रकार

Labour Law Bare Act – FAQs

Labour Law Bare Act क्या होता है?

Labour Law Bare Act उन मूल श्रम कानूनों का शुद्ध और मूल पाठ होता है, जिसमें केवल अधिनियम की धाराएँ होती हैं, व्याख्या नहीं।

Bare Act पढ़ने से कानून की वास्तविक भाषा और कानूनी प्रावधानों को सही रूप में समझा जा सकता है।

इसमें श्रम कानूनों की धाराएँ, उपधाराएँ, परिभाषाएँ और अनुसूचियाँ शामिल होती हैं।

यह कानून के छात्रों, वकीलों, HR प्रोफेशनल्स और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए उपयोगी होता है।

Bare Act में केवल कानून का मूल पाठ होता है, जबकि पुस्तकों में उसकी व्याख्या और उदाहरण दिए जाते हैं।

Factories Act, Minimum Wages Act, Industrial Disputes Act और Employees’ Provident Fund Act प्रमुख Bare Acts हैं।

हाँ, कई परीक्षाओं में परिभाषाएँ, धाराएँ और कानूनी शब्दावली Bare Act से पूछी जाती हैं।

धाराओं को ध्यान से पढ़ना, महत्वपूर्ण शब्दों को नोट करना और नियमित रिवीजन करना चाहिए।

हाँ, कई सरकारी और शैक्षणिक वेबसाइटों पर Bare Act का पाठ उपलब्ध होता है।

यह कानूनी समझ को मजबूत बनाता है और श्रम कानूनों के सही अनुपालन में मदद करता है।

Share This Post On
Scroll to Top