Gross Profit Formula: परिभाषा, महत्व और गणना करना सीखें

gross profit formula

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इस लेख में हम Gross profit formula और इससे सम्‍बंधित पहलुओं पर विस्‍तार से चर्चा करेंगे।

व्यवसाय की दुनिया में लाभ (Profit) सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। किसी भी कंपनी की सफलता को मापने का पहला और बुनियादी पैमाना उसका ग्रॉस प्रॉफिट (Gross Profit) होता है। यह न केवल व्यवसाय की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कंपनी अपने संसाधनों का उपयोग कितनी कुशलता से कर रही है।

इस ब्लॉग पोस्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि ग्रॉस प्रॉफिट क्या है, इसका फॉर्मूला (gross profit formula) क्या है? और इसे कैसे निकाला जाता है?

Gross profit formula को समझने से पहले ग्रॉस प्रॉफिट (gross profit) क्‍या होता हैं? यह समझना जरुरी हैं।

ग्रॉस प्रॉफिट का अर्थ है – कंपनी द्वारा अर्जित कुल राजस्व (Revenue) में से उसकी विक्रय लागत (Cost of Goods Sold – COGS) घटाने के बाद बचा हुआ लाभ।

दूसरे शब्दों में, यह वह राशि है जो कंपनी को अपने उत्पाद या सेवाएँ बेचने के बाद, उत्पादन लागत और सीधी खर्चों को घटाने पर प्राप्त होती है। इसमें प्रशासनिक खर्च, ब्याज और कर शामिल नहीं होते।

सरल उदाहरण:
अगर किसी कंपनी ने 10 लाख रुपये की बिक्री की और उस पर 6 लाख रुपये की लागत (कच्चा माल, मजदूरी, उत्पादन खर्च) लगी, तो ग्रॉस प्रॉफिट = 10 लाख – 6 लाख = 4 लाख रुपये होगा।

ग्रॉस प्रॉफिट फॉर्मूला (Gross Profit Formula)

ग्रॉस प्रॉफिट निकालने का सबसे सामान्य सूत्र है:

Gross Profit = Net Sales – Cost of Goods Sold (COGS)

जहाँ,

  • Net Sales (शुद्ध बिक्री): कुल बिक्री से बिक्री वापसी (Sales Return), छूट (Discount) आदि घटाकर प्राप्त राशि।

  • COGS (विक्रय लागत): इसमें कच्चा माल, मजदूरी, उत्पादन खर्च और अन्य प्रत्यक्ष खर्च शामिल होते हैं।

ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन (Gross Profit Margin)

कंपनी की लाभप्रदता का सही विश्लेषण करने के लिए केवल ग्रॉस प्रॉफिट जानना या gross profit formula जान लेना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन (Gross Profit Margin) भी निकाला जाता है।

इसका सूत्र है:

Gross Profit Margin (%) = (Gross Profit ÷ Net Sales) × 100

यह प्रतिशत बताता है कि बिक्री का कितना भाग लाभ में बदल रहा है।

उदाहरण:
मान लीजिए –

  • Net Sales = ₹5,00,000

  • COGS = ₹3,00,000

तो,
Gross Profit = 5,00,000 – 3,00,000 = ₹2,00,000
Gross Profit Margin = (2,00,000 ÷ 5,00,000) × 100 = 40%

ग्रॉस प्रॉफिट का महत्व (Importance of Gross Profit)

  1. लाभप्रदता का मापन: यह दर्शाता है कि व्यवसाय कितना लाभकारी है।

  2. लागत नियंत्रण: यदि ग्रॉस प्रॉफिट घट रहा है, तो इसका अर्थ है कि उत्पादन लागत बढ़ रही है।

  3. व्यवसाय रणनीति: इससे पता चलता है कि मूल्य निर्धारण (Pricing) और लागत प्रबंधन सही दिशा में है या नहीं।

  4. निवेशक का विश्वास: निवेशक और बैंक किसी कंपनी में निवेश करने से पहले ग्रॉस प्रॉफिट को जरूर देखते हैं।

  5. भविष्य की योजना: इससे व्यवसाय यह तय करता है कि आगे किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

ग्रॉस प्रॉफिट और नेट प्रॉफिट में अंतर (Difference Between Gross Profit and Net Profit)

आधारग्रॉस प्रॉफिटनेट प्रॉफिट
परिभाषाशुद्ध बिक्री से केवल COGS घटाने पर प्राप्त लाभशुद्ध बिक्री से सभी प्रकार के खर्च (COGS, प्रशासनिक खर्च, ब्याज, कर) घटाने पर प्राप्त लाभ
खर्च शामिलकेवल प्रत्यक्ष खर्च (Direct Expenses)प्रत्यक्ष + अप्रत्यक्ष सभी खर्च
उद्देश्यउत्पादन और बिक्री की दक्षता बतानाकंपनी की समग्र वित्तीय स्थिति बताना

ग्रॉस प्रॉफिट बढ़ाने के तरीके (Ways to Increase Gross Profit)

  1. बिक्री मूल्य बढ़ाना: यदि मार्केट अनुमति दे तो उत्पाद का मूल्य बढ़ाएँ।

  2. उत्पादन लागत घटाना: सस्ते कच्चे माल के स्रोत ढूँढना या उत्पादन प्रक्रिया में दक्षता लाना।

  3. व्यर्थ खर्च रोकना: अनावश्यक संसाधनों पर खर्च कम करें।

  4. बेहतर बिक्री रणनीति: सही मार्केटिंग और ब्रांडिंग से अधिक बिक्री करें।

  5. सप्लाई चेन मैनेजमेंट: सही आपूर्ति प्रबंधन से लागत कम की जा सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

ग्रॉस प्रॉफिट फॉर्मूला (gross profit formula) किसी भी व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को समझने का सबसे सरल और महत्वपूर्ण तरीका है।

Gross profit formula केवल कंपनी की कमाई नहीं बताता, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि व्यवसाय अपनी उत्पादन लागत को किस हद तक नियंत्रित कर रहा है।

यदि कोई व्यवसाय लगातार अच्छा ग्रॉस प्रॉफिट बना रहा है, तो इसका अर्थ है कि वह प्रतिस्पर्धी बाजार में स्थिर और लाभकारी रूप से आगे बढ़ रहा है।

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Gross Profit Formula – FAQs (सकल लाभ सूत्र : अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

सकल लाभ (Gross Profit) क्या होता है?

सकल लाभ वह लाभ होता है जो कुल बिक्री से माल की लागत (Cost of Goods Sold) घटाने के बाद प्राप्त होता है।

सकल लाभ = कुल बिक्री – माल की लागत (COGS)

माल की लागत में कच्चा माल, प्रत्यक्ष श्रम और उत्पादन से जुड़ी प्रत्यक्ष लागतें शामिल होती हैं।

सकल लाभ में केवल उत्पादन लागत घटाई जाती है, जबकि शुद्ध लाभ में सभी खर्चे और कर घटाए जाते हैं।

यह व्यवसाय की उत्पादन क्षमता और मूल्य निर्धारण (Pricing) की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

यह प्रतिशत में सकल लाभ को दर्शाता है और सूत्र है:
सकल लाभ मार्जिन = (सकल लाभ ÷ कुल बिक्री) × 100

इसका उपयोग व्यवसाय की लाभप्रदता, उद्योग तुलना और वित्तीय विश्लेषण में किया जाता है।

उच्च उत्पादन लागत, कम बिक्री मूल्य, कच्चे माल की कीमत बढ़ना या खराब लागत नियंत्रण इसके कारण हो सकते हैं।

लागत घटाकर, उत्पादन दक्षता बढ़ाकर और सही मूल्य निर्धारण अपनाकर सकल लाभ बढ़ाया जा सकता है।

व्यवसायी, अकाउंटेंट, निवेशक और वित्तीय विश्लेषक सकल लाभ का उपयोग करते हैं।

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