Diagonal Communication: 3 Importance in Modern Organizations

तिर्यक संचार

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Table of Contents

प्रस्तावना (Introduction)

संचार (Communication) किसी भी संगठन का आधार होता है। यह संगठन में कार्यप्रवाह, समझ, तालमेल और निर्णय प्रक्रिया को सहज बनाता है। संचार के विभिन्न प्रकारों में ऊर्ध्व संचार (Upward Communication), अधोमुखी संचार (Downward Communication), क्षैतिज संचार (Horizontal Communication) और तिर्यक संचार (Diagonal Communication) शामिल हैं। इनमें से तिर्यक संचार को अक्सर सबसे आधुनिक और लचीला संचार का रूप माना जाता है।

तिर्यक संचार का अर्थ है संगठन के अलग-अलग विभागों, अलग-अलग स्तरों और विभिन्न पदों के बीच सीधे संवाद की प्रक्रिया, जिसमें परंपरागत आदेश-श्रृंखला (Chain of Command) को दरकिनार कर, जरूरत के अनुसार संचार स्थापित किया जाता है।

तिर्यक संचार को विकर्ण संचार भी कहा जाता हैं।

तिर्यक संचार और विकर्ण संचार दोनो को अंग्रेजी भाषा में Diagonal Communication कहा जाता हैं।

इस लेख में हम संचार के इस प्रकार या type को तिर्यक और विकर्ण दोनों तरह के संचार कहने के बजाय सिर्फ तिर्यक संचार कहकर ही संबोधित करेंगे।

और जहां-जहां आवश्‍यकता हैं, वहां-वहां पर तिर्यक संचार के आगे कोष्ठक (Bracket) का उपयोग करेंगे और कोष्ठक में Diagonal Communication शब्‍द का उपयोग करेंगे।

इस लेख के अंत में तिर्यक संचार (Diagonal Communication) से सम्‍बंधित FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) भी दिए गए हैं।

FAQs में हम तिर्यक संचार के स्‍थान पर विकर्ण संचार शब्‍द का उपयोग करेंगे।

डायगोनल कम्युनिकेशन (Diagonal Communication) क्या है?

डायगोनल कम्युनिकेशन (Diagonal Communication) वह संचार है जो अलग-अलग विभागों और अलग-अलग संगठनात्मक स्तरों (Different Departments and Different Hierarchical Levels) के कर्मचारियों या अधिकारियों के बीच होता है।

इसे क्रॉस-फंक्शनल कम्युनिकेशन (Cross-Functional Communication) भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें सूचना केवल ऊपर-नीचे या समान स्तर पर नहीं, बल्कि संगठन के विभिन्न विभागों और विभिन्न पदों के बीच प्रवाहित होती है।

उदाहरण के लिए—

  • आईटी विभाग का अधिकारी सीधे मार्केटिंग टीम के सुपरवाइज़र से बात करता है।
  • मानव संसाधन (HR) विभाग का प्रबंधक किसी प्रोजेक्ट टीम के सदस्य से सीधे जानकारी प्राप्त करता है।
  • वित्त विभाग का वरिष्ठ अधिकारी उत्पादन विभाग के जूनियर इंजीनियर से परियोजना संबंधी जानकारी साझा करता है।

इन सभी स्थितियों में डायगोनल कम्युनिकेशन होता है।

तिर्यक संचार की परिभाषा (Definition of Diagonal Communication)

तिर्यक संचार वह प्रक्रिया है जिसमें संगठन के किसी विभाग का कर्मचारी सीधे दूसरे विभाग के किसी कर्मचारी या अधिकारी से संवाद करता है, चाहे उनके बीच पदानुक्रम (Hierarchy) का कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो।

उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी का उत्पादन प्रबंधक (Production Manager) सीधे वित्त विभाग के उप-प्रबंधक (Deputy Manager Finance) से बात करता है, तो यह तिर्यक संचार कहलाएगा। इसमें दोनों ही लोग अलग-अलग विभाग और अलग-अलग स्तरों से जुड़े होते हैं, लेकिन संवाद का उद्देश्य कार्य को तीव्र और प्रभावी बनाना होता है।

तिर्यक संचार की विशेषताएँ (Characteristics of Diagonal Communication)

  1. अलग-अलग विभागों के बीच संचार

इसमें सूचना एक विभाग से दूसरे विभाग तक पहुँचती है।

उदाहरण:

मार्केटिंग विभाग का कर्मचारी आईटी विभाग के अधिकारी से संपर्क करता है।

  1. अलग-अलग पदों के बीच संचार

इसमें समान स्तर पर संचार होना आवश्यक नहीं है।

उदाहरण:

एक वरिष्ठ प्रबंधक सीधे किसी जूनियर कर्मचारी से परियोजना संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकता है।

  1. तेज़ सूचना प्रवाह

पारंपरिक पदानुक्रम का पालन किए बिना आवश्यक जानकारी सीधे संबंधित व्यक्ति तक पहुँच जाती है।

  1. सहयोगात्मक प्रकृति

डायगोनल कम्युनिकेशन का मुख्य उद्देश्य सहयोग और समन्वय बढ़ाना होता है।

  1. परियोजना-आधारित कार्यों में उपयोगी

जब विभिन्न विभागों की संयुक्त भागीदारी आवश्यक होती है, तब यह संचार सबसे अधिक प्रभावी होता है।

  1. आधुनिक संगठनात्मक संरचना के अनुकूल

मैट्रिक्स संगठन (Matrix Organization), स्टार्टअप, आईटी कंपनियाँ और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इस संचार का व्यापक उपयोग करती हैं।

  1. दो-तरफ़ा संचार

इसमें सूचना केवल एक दिशा में नहीं जाती, बल्कि दोनों पक्ष अपने विचार और प्रतिक्रिया साझा करते हैं।

Diagonal Communication का महत्व

आज के प्रतिस्पर्धी व्यावसायिक वातावरण में अधिकांश कार्य एक ही विभाग द्वारा पूरे नहीं किए जा सकते। एक सफल परियोजना के लिए कई विभागों का सहयोग आवश्यक होता है। ऐसे में डायगोनल कम्युनिकेशन अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है।

इसके प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं—

  • विभागों के बीच बेहतर समन्वय।
  • तेज़ निर्णय लेने की क्षमता।
  • सूचना का शीघ्र आदान-प्रदान।
  • टीमवर्क में सुधार।
  • परियोजनाओं का समय पर निष्पादन।
  • नवाचार और रचनात्मक सोच को बढ़ावा।
  • संगठन की उत्पादकता में वृद्धि।
  • ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करना।

Diagonal Communication के उद्देश्य

इस प्रकार के संचार का उद्देश्य केवल सूचना भेजना नहीं, बल्कि पूरे संगठन में सहयोग और कार्यकुशलता बढ़ाना होता है।

इसके प्रमुख उद्देश्य हैं—

  • विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना।
  • परियोजनाओं को समय पर पूरा करना।
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज़ बनाना।
  • सूचना के प्रवाह को सरल बनाना।
  • विभागीय बाधाओं (Departmental Barriers) को कम करना।
  • टीमवर्क और सहयोग को बढ़ावा देना।
  • समस्याओं का शीघ्र समाधान करना।
  • नवाचार (Innovation) को प्रोत्साहित करना।

Diagonal Communication कैसे कार्य करता है?

मान लीजिए कि एक ई-कॉमर्स कंपनी नया मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च कर रही है।

इस परियोजना में—

  • आईटी टीम ऐप विकसित करती है।
  • मार्केटिंग टीम प्रचार रणनीति बनाती है।
  • वित्त विभाग बजट तैयार करता है।
  • ग्राहक सेवा विभाग संभावित प्रश्नों की सूची बनाता है।
  • कानूनी विभाग नियमों की समीक्षा करता है।

यदि प्रत्येक विभाग केवल अपने वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से संवाद करे, तो प्रक्रिया धीमी हो सकती है। लेकिन यदि संबंधित कर्मचारी सीधे एक-दूसरे से आवश्यक जानकारी साझा करें, तो कार्य अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से पूरा होता है। यही डायगोनल कम्युनिकेशन है।

Diagonal Communication के प्रकार

  1. विभागों के बीच विभिन्न स्तरों का संचार

उदाहरण:

HR मैनेजर का उत्पादन विभाग के सुपरवाइज़र से संवाद।

  1. परियोजना-आधारित संचार

जब विभिन्न विभागों के कर्मचारी एक ही परियोजना पर कार्य करते हैं।

  1. तकनीकी सहयोग

आईटी विशेषज्ञों द्वारा अन्य विभागों के कर्मचारियों को तकनीकी सहायता देना।

  1. समस्या समाधान आधारित संचार

किसी विशेष समस्या को हल करने के लिए अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों का सीधे संवाद करना।

तिर्यक संचार के उदाहरण(Examples of Diagonal Communication)

उदाहरण 1

आईटी विभाग का वरिष्ठ अधिकारी सीधे मार्केटिंग टीम के कर्मचारी को नई वेबसाइट के उपयोग का प्रशिक्षण देता है।

उदाहरण 2

वित्त विभाग का प्रबंधक उत्पादन विभाग के इंजीनियर से परियोजना लागत की जानकारी प्राप्त करता है।

उदाहरण 3

ग्राहक सेवा विभाग का कर्मचारी उत्पाद विकास (Product Development) टीम को ग्राहकों की शिकायतों की जानकारी देता है।

उदाहरण 4

एचआर विभाग का अधिकारी किसी अन्य विभाग के टीम लीडर के साथ भर्ती योजना पर चर्चा करता है।

तिर्यक संचार के लाभ (Advantages of Diagonal Communication)

Advantages of Diagonal Communication
  1. निर्णय लेने की गति बढ़ती है

आवश्यक जानकारी सीधे संबंधित व्यक्ति तक पहुँचने से निर्णय जल्दी लिए जा सकते हैं।

  1. विभागीय बाधाएँ कम होती हैं

विभिन्न विभागों के बीच सहयोग बढ़ता है।

  1. बेहतर समन्वय

सभी टीमें साझा उद्देश्य की दिशा में कार्य करती हैं।

  1. परियोजनाएँ समय पर पूरी होती हैं

जानकारी में देरी कम होने से कार्य समय पर पूरे होते हैं।

  1. कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ती है

कर्मचारियों को सीधे संवाद करने का अवसर मिलता है।

  1. नवाचार को बढ़ावा मिलता है

अलग-अलग विभागों के अनुभव और विचार मिलकर नए समाधान विकसित करते हैं।

  1. ग्राहक सेवा में सुधार

विभागों के बीच बेहतर समन्वय के कारण ग्राहकों की समस्याओं का समाधान तेज़ी से होता है।

  1. संगठन की उत्पादकता बढ़ती है

तेज़ संचार और बेहतर सहयोग से समग्र कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।

तिर्यक संचार की सीमाएँ (Limitations of Diagonal Communication)

  1. औपचारिकता का अभाव – पारंपरिक पदानुक्रम टूटने से अनुशासन संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

  2. अधिकार-क्षेत्र का उल्लंघन – कभी-कभी कर्मचारी अपने वरिष्ठों को दरकिनार कर सीधे दूसरे विभाग से संवाद करते हैं, जिससे टकराव हो सकता है।

  3. सूचना की गलत व्याख्या – बिना आधिकारिक अनुमति के सीधे संवाद में गलतफहमी की संभावना बढ़ जाती है।

  4. ईर्ष्या और असहमति – वरिष्ठ अधिकारियों को लग सकता है कि उनकी भूमिका को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।

  5. नियंत्रण में कठिनाई – जब हर विभाग और कर्मचारी स्वतंत्र रूप से संवाद करने लगे तो समग्र नियंत्रण कमजोर हो सकता है।

तिर्यक संचार बनाम अन्य संचार (Diagonal Communication Versus Other Types of Communication)

  • ऊर्ध्व संचार में अधीनस्थ अपने वरिष्ठ को सूचना देते हैं, जबकि तिर्यक संचार में किसी भी स्तर पर कोई भी व्यक्ति सीधे अन्य विभाग से जुड़ सकता है।

ऊर्ध्व संचार (Upward Communication): अर्थ, महत्व और उदाहरण

  • अधोमुखी संचार आदेश और निर्देशों के लिए प्रयोग होता है, जबकि तिर्यक संचार अधिकतर सहयोग और समस्या-समाधान पर केंद्रित होता है।

अधोमुखी संचार (Downward Communication): अर्थ, महत्व, उदाहरण

  • क्षैतिज संचार समान स्तर के कर्मचारियों के बीच होता है, जबकि तिर्यक संचार में स्तर और विभाग दोनों बदल जाते हैं।

क्षैतिज संचार (Lateral Communication): अर्थ, महत्व और उदाहरण

आधुनिक संगठनों में तिर्यक संचार का महत्व (The Importance of Diagonal Communication in Modern Organizations)

आज के प्रतिस्पर्धी और गतिशील व्यावसायिक परिवेश में संगठन को तेजी से निर्णय लेना पड़ता है। परंपरागत ऊर्ध्व और अधोमुखी संचार में अक्सर समय बर्बाद होता है। ऐसे में तिर्यक संचार संगठन को फुर्तीला और नवाचार के लिए सक्षम बनाता है।

  1. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ – विभिन्न देशों और विभागों के बीच सीधे संवाद की आवश्यकता होती है।

  2. आईटी कंपनियाँ – त्वरित समाधान और तकनीकी सहयोग के लिए तिर्यक संचार आवश्यक है।

  3. स्टार्टअप्स – सीमित संसाधनों में तेज़ निर्णय और विभागों में तालमेल के लिए यह सबसे उपयोगी तरीका है।

तिर्यक संचार को प्रभावी बनाने के उपाय (Measures to Make Diagonal Communication Effective)

  • स्पष्ट संचार नीति बनाएं

संगठन में यह निर्धारित होना चाहिए कि किन परिस्थितियों में सीधे संवाद किया जा सकता है।

  • भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ स्पष्ट करें

सभी कर्मचारियों को अपनी भूमिका और अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए।

  • सहयोगी संस्कृति विकसित करें

ऐसा वातावरण बनाएँ जहाँ विभाग एक-दूसरे के साथ खुलकर काम करें।

  • डिजिटल संचार उपकरणों का उपयोग करें

आधुनिक सहयोगी प्लेटफ़ॉर्म सूचना साझा करने को आसान बनाते हैं।

  • नियमित समन्वय बैठकें आयोजित करें

क्रॉस-फंक्शनल टीमों की नियमित बैठकें संचार को बेहतर बनाती हैं।

  • फीडबैक प्रणाली विकसित करें

प्रभावी प्रतिक्रिया (Feedback) से संचार की गुणवत्ता में लगातार सुधार किया जा सकता है।

Diagonal Communication के माध्यम

आधुनिक संगठनों में निम्नलिखित माध्यमों का उपयोग किया जाता है—

  • ईमेल
  • वीडियो कॉन्फ्रेंस
  • Microsoft Teams
  • Slack
  • Google Meet
  • Google Chat
  • Zoom
  • परियोजना प्रबंधन सॉफ्टवेयर (Project Management Software)
  • साझा दस्तावेज़ (Shared Documents)
  • आमने-सामने बैठकें

निष्कर्ष (Conclusion)

Diagonal Communication आधुनिक संगठनों की एक महत्वपूर्ण संचार प्रणाली है, जो विभिन्न विभागों और विभिन्न संगठनात्मक स्तरों के कर्मचारियों के बीच सीधे संवाद को संभव बनाती है। यह पारंपरिक पदानुक्रम की सीमाओं को कम करते हुए सहयोग, समन्वय और कार्यकुशलता को बढ़ावा देता है।

हालाँकि, इस संचार को सफल बनाने के लिए स्पष्ट नीतियाँ, पारदर्शिता, जिम्मेदारियों की स्पष्टता और प्रभावी संचार कौशल आवश्यक हैं। यदि संगठन इन बातों का ध्यान रखे, तो डायगोनल कम्युनिकेशन उत्पादकता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और ग्राहकों को बेहतर सेवाएँ प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अनौपचारिक संचार (Informal Communication): सम्‍पूर्ण जानकारी

Diagonal Communication – FAQs (विकर्ण संचार : अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

विकर्ण संचार (Diagonal Communication) क्या है?

विकर्ण संचार वह प्रक्रिया है जिसमें संगठन के विभिन्न विभागों और अलग-अलग स्तरों के कर्मचारियों के बीच सीधे संचार होता है।

क्योंकि यह न तो पूरी तरह ऊर्ध्वाधर होता है और न ही क्षैतिज, बल्कि दोनों का मिश्रण होता है, जो संगठन संरचना में तिरछी (Diagonal) दिशा में चलता है।

इसका उद्देश्य तेजी से सूचना साझा करना, समन्वय बढ़ाना और कार्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना होता है।

किसी विभाग का मैनेजर दूसरे विभाग के कर्मचारी से सीधे बात करे, या प्रोजेक्ट टीम में अलग-अलग स्तरों के सदस्य आपस में संवाद करें।

यह निर्णय लेने की गति बढ़ाता है, विभागीय बाधाएँ कम करता है और टीमवर्क को मजबूत बनाता है।

बेहतर समन्वय, तेज़ समस्या समाधान, प्रभावी सूचना प्रवाह और कार्यक्षमता में वृद्धि इसके प्रमुख लाभ हैं।

यदि नियंत्रण न हो तो यह अधिकारों में भ्रम, अनुशासनहीनता और टकराव का कारण बन सकता है।

क्षैतिज संचार समान स्तर के कर्मचारियों के बीच होता है, जबकि विकर्ण संचार अलग-अलग स्तर और विभागों के बीच होता है।

स्पष्ट भूमिका निर्धारण, खुले संवाद की संस्कृति और उचित दिशा-निर्देशों से विकर्ण संचार को प्रभावी बनाया जा सकता है।

आधुनिक, मैट्रिक्स और प्रोजेक्ट-आधारित संगठनों में विकर्ण संचार नवाचार और तेजी से काम पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है।

इसे विकर्ण संचार कहा जाता है।

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