क्षैतिज संचार (Lateral Communication): अर्थ, महत्व और उदाहरण

क्षैतिज संचार

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संगठन में संचार (Communication) केवल ऊपर से नीचे (Downward) या नीचे से ऊपर (Upward) ही नहीं होता, बल्कि समान स्तर (Same Level) के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच भी होता है। इसे क्षैतिज संचार (Horizontal Communication) या Lateral Communication कहा जाता है।

आज के समय में, जहाँ टीम वर्क और सहयोग (Collaboration) संगठन की सफलता की कुंजी है, वहाँ क्षैतिज संचार का महत्व और भी बढ़ गया है। यह लेख आपको क्षैतिज संचार की परिभाषा, उद्देश्य, लाभ, चुनौतियाँ और उदाहरणों की गहराई से जानकारी देगा।

क्षैतिज संचार (Horizontal Communication) वह संचार प्रक्रिया है जिसमें संगठन के समान स्तर (Same Level) पर कार्य करने वाले व्यक्ति, विभाग या इकाइयाँ आपस में संवाद करती हैं।

सरल शब्दों में, जब मैनेजर से मैनेजर, टीम लीडर से टीम लीडर, या कर्मचारी से कर्मचारी अपने विचार, सुझाव, जानकारी या समस्या साझा करते हैं, तो उसे क्षैतिज संचार कहते हैं।

उदाहरण:

  • एक कंपनी के मार्केटिंग विभाग का मैनेजर प्रोडक्शन विभाग के मैनेजर से नए प्रोडक्ट की योजना पर चर्चा करता है।

  • एक स्कूल में गणित शिक्षक और विज्ञान शिक्षक आपस में बच्चों की पढ़ाई की रणनीति पर विचार करते हैं।

क्षैतिज संचार के उद्देश्य (Objectives of Horizontal Communication)

  1. सहयोग बढ़ाना (Promoting Collaboration):
    विभिन्न विभागों और कर्मचारियों के बीच आपसी सहयोग स्थापित करना।

  2. सूचना का आदान-प्रदान (Sharing Information):
    समान स्तर पर कार्यरत व्यक्तियों के बीच आवश्यक जानकारी साझा करना।

  3. समस्या समाधान (Problem Solving):
    विभागीय या टीम स्तर की समस्याओं को मिलकर हल करना।

  4. कार्य समन्वय (Coordination of Work):
    विभिन्न विभागों और टीमों के बीच कार्यों का तालमेल स्थापित करना।

  5. निर्णय लेने में सहायता (Support in Decision Making):
    सामूहिक चर्चा के आधार पर बेहतर निर्णय लेना।

क्षैतिज संचार की विशेषताएँ (Characteristics of Horizontal Communication)

  1. समान स्तर पर संवाद (Communication at Same Level):
    यह संचार समान पद या जिम्मेदारी वाले कर्मचारियों के बीच होता है।

  2. अनौपचारिक और औपचारिक दोनों (Formal & Informal):
    यह कभी बैठक (Formal) के माध्यम से तो कभी कॉफी ब्रेक (Informal) में भी हो सकता है।

  3. टीम वर्क पर आधारित (Team-Oriented):
    इसका मुख्य उद्देश्य सहयोग और समन्वय है।

  4. त्वरित और सरल (Fast & Simple):
    चूँकि इसमें औपचारिकता कम होती है, इसलिए संवाद जल्दी और प्रभावी होता है।

  5. दोतरफ़ा संवाद (Two-Way Communication):
    इसमें विचार-विमर्श और प्रतिक्रिया (Feedback) दोनों शामिल होते हैं।

क्षैतिज संचार के माध्यम (Channels of Horizontal Communication)

  1. बैठकें (Meetings):
    टीम मीटिंग्स या इंटर-डिपार्टमेंटल मीटिंग्स।

  2. लिखित माध्यम (Written Mediums):
    ईमेल, रिपोर्ट, साझा दस्तावेज़।

  3. मौखिक संवाद (Oral Communication):
    प्रत्यक्ष वार्ता, टेलीफोन या वीडियो कॉल।

  4. डिजिटल माध्यम (Digital Mediums):
    चैट ग्रुप, सहयोगी प्लेटफॉर्म (जैसे Slack, Teams)।

  5. अनौपचारिक वार्तालाप (Informal Talks):
    लंच या कॉफी ब्रेक के दौरान विचारों का आदान-प्रदान।

क्षैतिज संचार के लाभ (Advantages of Horizontal Communication)

Advantages of Horizontal Communication
  1. समन्वय में वृद्धि (Improved Coordination):
    विभागों और टीमों के बीच तालमेल बढ़ता है।

  2. त्वरित समस्या समाधान (Quick Problem Solving):
    समान स्तर के लोग तुरंत समाधान निकाल सकते हैं।

  3. सहयोगी वातावरण (Collaborative Environment):
    इससे संगठन में सहयोग और टीम वर्क की भावना बढ़ती है।

  4. निर्णय की गुणवत्ता (Better Decision Making):
    विभिन्न विचारों और अनुभवों से निर्णय अधिक प्रभावी बनते हैं।

  5. तनाव में कमी (Reduced Stress):
    सहकर्मियों से संवाद करने से कार्यस्थल का दबाव कम होता है।

ऊर्ध्व संचार (Upward Communication): अर्थ, महत्व और उदाहरण

क्षैतिज संचार की सीमाएँ / चुनौतियाँ (Limitations/Challenges of Horizontal Communication)

  1. अत्यधिक अनौपचारिकता (Over Informality):
    यदि यह बहुत अनौपचारिक हो जाए तो अनुशासन बिगड़ सकता है।

  2. गलतफहमी की संभावना (Risk of Misunderstanding):
    बिना औपचारिक दस्तावेज़ीकरण के संदेश गलत समझे जा सकते हैं।

  3. सूचना का अतिरेक (Information Overload):
    कई बार कर्मचारी आपस में बहुत अधिक जानकारी साझा करते हैं जिससे भ्रम पैदा होता है।

  4. समय की बर्बादी (Time-Consuming):
    यदि अनावश्यक चर्चाएँ हों तो कार्य की गति धीमी हो सकती है।

  5. टकराव की संभावना (Possibility of Conflict):
    अलग-अलग विचारों के कारण मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं।

क्षैतिज संचार के उदाहरण (Examples of Horizontal Communication)

  1. कॉरपोरेट सेक्टर में:
    मार्केटिंग और सेल्स टीम के बीच प्रोडक्ट प्रमोशन की रणनीति पर चर्चा।

  2. शैक्षिक संस्थान में:
    एक कॉलेज में विभिन्न विषयों के शिक्षक आपस में छात्रों की प्रगति पर विचार करते हैं।

  3. स्वास्थ्य सेवा में:
    अस्पताल में डॉक्टर, नर्स और तकनीशियन मिलकर रोगी के इलाज की योजना बनाते हैं।

  4. सरकारी संगठन में:
    विभिन्न विभागों के अधिकारी किसी योजना को लागू करने के लिए आपस में तालमेल करते हैं।

अधोमुखी संचार (Downward Communication): अर्थ, महत्व, उदाहरण

अधोमुखी, ऊर्ध्व और क्षैतिज संचार में अंतर (The Difference Between Downward, Upward, and Horizontal Communication.)

बिंदुअधोमुखी संचार (Downward)ऊर्ध्व संचार (Upward)क्षैतिज संचार (Horizontal)
दिशाऊपर से नीचेनीचे से ऊपरसमान स्तर पर
उद्देश्यआदेश और निर्देश देनाप्रतिक्रिया और सुझाव देनासहयोग और समन्वय करना
प्रकृतिएकतरफ़ादोतरफ़ादोतरफ़ा
उदाहरणमैनेजर से कर्मचारी तक आदेशकर्मचारी से मैनेजर तक शिकायतविभागाध्यक्ष से विभागाध्यक्ष तक संवाद

क्षैतिज संचार को प्रभावी बनाने के उपाय (Measures to Make Horizontal Communication Effective)

  1. स्पष्ट और सरल भाषा का प्रयोग करें।

  2. डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करें।

  3. अनावश्यक चर्चाओं से बचें।

  4. साझा लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें।

  5. मतभेद को सकारात्मक ढंग से सुलझाएँ।

निष्कर्ष (Conclusion)

क्षैतिज संचार (Lateral/Horizontal Communication) आधुनिक संगठनों की सफलता के लिए अनिवार्य है। यह समान स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों और विभागों के बीच सहयोग, समन्वय और आपसी समझ को बढ़ाता है।

हालाँकि इसमें गलतफहमी और समय की बर्बादी जैसी चुनौतियाँ हो सकती हैं, फिर भी यदि इसे सही दिशा और उद्देश्य के साथ अपनाया जाए तो यह संगठनात्मक कार्यकुशलता (Efficiency) को कई गुना बढ़ा सकता है।

आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में, कोई भी संगठन तभी सफल हो सकता है जब उसमें अधोमुखी (Downward), ऊर्ध्व (Upward) और क्षैतिज (Horizontal) – तीनों संचार प्रक्रियाएँ संतुलित रूप से विकसित हों।

अनौपचारिक संचार (Informal Communication): सम्‍पूर्ण जानकारी

Lateral Communication – FAQs (क्षैतिज संचार : अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

क्षैतिज संचार (Lateral Communication) क्या है?

क्षैतिज संचार वह प्रक्रिया है जिसमें संगठन के एक ही स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों या विभागों के बीच सूचना का आदान-प्रदान होता है।

इसका उद्देश्य समन्वय बढ़ाना, टीमवर्क सुधारना और कार्यों को सुचारु रूप से पूरा करना होता है।

यह विभागों के बीच सहयोग बढ़ाता है, गलतफहमियाँ कम करता है और निर्णय प्रक्रिया को तेज़ बनाता है।

एक ही स्तर के मैनेजरों की मीटिंग, टीम डिस्कशन, ई-मेल, चैट ग्रुप और प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेशन इसके उदाहरण हैं।

मीटिंग, ई-मेल, इंट्रानेट, टीम मैसेजिंग टूल्स और प्रोजेक्ट रिपोर्ट इसके प्रमुख माध्यम हैं।

बेहतर समन्वय, तेज़ समस्या समाधान, टीम भावना और उत्पादकता में वृद्धि इसके मुख्य लाभ हैं।

यदि नियंत्रण न हो तो यह समय की बर्बादी, टकराव या अधिकारों की अस्पष्टता का कारण बन सकता है।

क्षैतिज संचार समान स्तर पर होता है, जबकि ऊर्ध्वाधर संचार ऊपर-नीचे के स्तरों के बीच होता है।

टीमवर्क संस्कृति, खुला संवाद, सहयोगी टूल्स और स्पष्ट भूमिकाओं से इसे बढ़ावा दिया जा सकता है।

आधुनिक संगठनों में यह क्रॉस-फंक्शनल टीमों, नवाचार और तेज़ निर्णय लेने में अहम भूमिका निभाता है।

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